14.4.07

इन्टरनेट पर हिंदी

यह सही है...बहुत ही सही है. ..आज बहुत दिनों के बाद मैं हिंदी में कुछ लिख रह हूँ और वह भी अंग्रेजी कीबोर्ड से... वैसे और कुछ भी लिखने से पहले मेरी तरफ से ब्लॉगर/गूगल समुह को धन्यवाद...

कई बार इस बारे में सोचा है मैंने, हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में दूसरे या तीसरे क्रम पर होगी लेकिन इन्टरनेट पर इसकी कितनी प्रतिनिधित्व है? और ऐसा क्यों है? शायद इसलिए कि हमें आज इस भाषा कि जरूरत नहीं रही है अपने भावनाओं एवं दृष्टीकोणों को व्यक्त करने के लिए? या शायद हम इसे अपनी संस्कृति का हिस्सा ही नहीं मानते? या शायद हमारे लिए संस्कृति की व्याख्या ही कुछ अलग है? या शायद हमें अपनी संस्कृति पर ही गर्व नहीं है? मेरे द्रिष्टिकोण से तो शायद यहीं सत्य है कि हिंदी को हम अपनी संस्कृति का वो हिस्सा नहीं मानते जिस पर हमें गर्व हो।
खैर, अपना-अपना दृष्टीकोण, अपनी-अपनी व्याख्या। मुझे तो अपने अभियांत्रिकी की पढ़ाई के दिनों के एक दोस्त, राजेश कुमार श्रीवास्तव, की बात याद आती है कि कोई भी व्यक्ति सपने अपनी मातृभाषा में देखेगा और ग़ुस्से में कहे गए अपशब्द तो अपनी मातृभाषा में में ही कहेगा। पता नहीं कितना सही है पर इससे ये तो ढांढस मिलती है की मेरे जीवन काल में हिंदी लुप्त नहीं होगी। शायद मैं हिंदी की कुछ अधिक ही खराब भविष्य देख रह होऊं। ख़ुशी होगी अगर मैं गलत साबित होऊं तो...
वैसे मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है...अब मैं शायद थोङा अधिक लिखूं इस ब्लोग पर....देखे...शायद...खैर एक बार फिर से...धन्यवाद गूगल/ब्लॉगर ....

2 comments:

Pratik Pandey said...

हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। आशा है कि आप नियमित तौर पर हिन्दी में लिखते रहेंगे।

HindiBlogs.com

Stillwater said...

Dhanyavad. Meri koshish to yahin rahegi.:)